Monday, February 16, 2009




मनु 'बेतखल्लुस' की गज़ल

हरकीरत जी के बाद पेश है मनु 'बेतखल्लुस' जी की एक गज़ल.
जिसने थामा अम्बर को वो तुझे सहारा भी देगा,
जिसने नज़र अता की है, वो कोई नज़ारा भी देगा
छोड़ ना यूँ उम्मीद का दामन, ऐसे भी मायूस न हो,
अभी छुपा है बेशक, पर वो कभी इशारा भी देगा
छोड़ अभी साहिल के सपने,मौजों से टकराता चल
यहीं हौसला नैया का, इक रोज किनारा भी देगा
दूर उफ़क से नज़र हटा मत, रात भले ये गहरी है
अंधियारों के बाद,वो तुझको सुबह का तारा भी देगा
देखे फ़कत सराब, मगर यूँ मूँद न तरसी आँखों को
प्यास का ये जज़्बा सहरा में, जल की धारा भी देगा
लाख मिटाए वक्त,तू अपनी कोशिश को जिंदा रखना,
हार का ये अपमान ही इक दिन, जीत का नारा भी देगा
साकी की नज़रें ही पीने वालों की तकदीरें हैं
करता है जो जाम फ़ना, वो जाम सहारा भी देगा

16 comments:

  1. सबसे पहले मनु जी को मैं कमेन्ट देना चाहूँगा के उन्होंने मेरे ब्लॉग में दिलचस्पी दिखाई.

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  2. शामिख जी, पसंद करने का शुक्रिया,,,,
    एक चीज कई बार महसूस की है,,,,,परेशानी की हालत में अगर कुछ ग़ज़ल या नज़्म जैसा हो जाए...तो हमेशा ही देखा है....के saari परेशानियां अपने आप ख़त्म हो जाती हैं....ख़त्म तो शायद न होती हों...paर एक अलग हौसला तो जरूर आ जाता है......

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  3. बहुत ही प्‍यारी गजल है, और उससे भी ज्‍यादा प्‍यारा ब्‍लॉग टम्‍पलेट। बहुत बहुत बधाई।

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  4. मनु जी वाह वाह .....

    जिसने थामा अम्बर को वो तुझे सहारा भी देगा,
    जिसने नज़र अता की है, वो कोई नज़ारा भी देगा
    क्या कहने....?
    साकी की नज़रें ही पीने वालों की तकदीरें हैं
    करता है जो जाम फ़ना, वो जाम सहारा भी देगा
    बहूत ही खूब ....!!

    शामिख जी,बधाई.....।

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  5. सोच बदल दो सितारे बदल जायेंगे
    नज़ारे बदल दो नज़ारे बदल जायंगे
    कश्तियाँ बदलने की ज़रूरत नही
    दिशा बदल दो किनारे बदल जायंगे
    समिख जी आप जैसो की इस दुनिया को बहुत जरुरत है धन्यवाद्

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  6. 'दूर उफ़क से नज़र हटा मत, रात भले ये गहरी है
    अंधियारों के बाद,वो तुझको सुबह का तारा भी देगा'
    - ऐसे सकारात्मक सोच के बूते ही व्यक्ति,समाज, देश तरक्की करता है.

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  7. bahut hi sundar ghazal pesh ki hai aapne... bahut hi achhi panktiyaan hai..
    "लाख मिटाए वक्त,तू अपनी कोशिश को जिंदा रखना,
    हार का ये अपमान ही इक दिन, जीत का नारा भी देगा"

    muje is baat ki behad khushi hai ki aapne muje apne blog par kuchh likhne layak samjha.
    waise zyada kavitaayein nahi likhi hai mene.
    mera shuruaati daur hai.
    muje khushi hogi agar aap meri kavita 'aadat' ko apne blog par post kar sake.

    mere blog par aapka swagat hai.

    Puneet Sahalot

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  8. kafi prernadayak kavita hai aapki manuji badhai.

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  9. manuji aap bahut sundar likhte hain

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  10. manu ji ki gazal kafi achhi hai aur sath hi wo photo bahut bahtareen hai jis ke lie main shamikh ji ko badhai dena chaunga.

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  11. nice photo jitni tareef ki jae kam hai. bahut hi zyada creative photo hai.

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  12. shamikh ji main aksar aapke is photo ko dekhkar motivate hota hun. maine bhi aapke blog ke lie aisa hi photo banaya hai. kya aap mera photo publish karenge.

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  13. vinod ji main bahut bahut shukraguzar hun aapka jo aap mere blog me itni dilchaspi rakhte hain. aur aap apna photo bhej den main publish kar dunga. shukriya

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  14. faraz mera bahut achha dost hai aur main use us k is anokhe kam ke lie mubarakbad kahna chaungi k usne un logo ko duniya se rubaru karane ki koshish ki hai jinse uska koi rishta bhi nahi hai.

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  15. बहुत उम्दा गज़ल है।बधाई स्वीकारे।

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