Sunday, February 8, 2009

हरकीरत हकीर की कविता

इस बार ब्लॉग के कविता भेजी है हरकीरत "हकीर" ने जो कि गुवाहाटी से हैं और ब्लॉग की दुनिया की जानी मानी कवियत्री है.
वक्त की नफा़सत
बरसों पहले
जीवन मर्यादाएँ
धूसर-धुँधल चित्र लिए
हस्‍तरेखाओं की तंग घाटियों में
हिचकोले खातीं रहीं....
उबड़-खाबड़
बीहडो़ में भटकती
गहरी निस्‍सारता लेकर
कैद में छटपटाती
आँखों में कातरता
भय और बेबसी की
आवांछित भीड़ लिए
इक तारीकी* पूरे वजूद में
उतर जाती...
वक्त नफा़सत* पूर्ण तरीके से
सीढियों पर बैठा
तस्वीर बनाता रहा...
तारों को छू पाने की कोशिश में
न जाने मुझे
कितने लंबे समय से
गुजर जाना पडा़...
आज मैंने...
चाँद से बातें करना सीख लिया है
रातों को आती है चाँदनी
दूर पुरनूर वादियों की
गहरी तलहटी से
दिखलाती है...
शिलाओं का नृत्य करना
उच्छवासों से पर्वतों का थिरकना
समुंद्री लहरों की थपेडो़ के बीच
सीपी में बैठी एक बूंद का
मोती बन जाना
उड़ते हुए पन्नों में
नज्‍़म बन
मेरी झोली में गिर जाना...
आज जब
दूर साल के दरख्‍तों से
छनकर आती धूप
थपथपाती है पीठ मेरी
हवाये सहलाती हैं घाव
धैर्य शंखनाद करता है
तब मैं...
तमाम तपते हर्फ़
तुम्हारी हथेली पर रख
पूछती हूँ....
उन सारे सवालों के जवाब...!!!
(तारीकी-अंधियारा
नफा़सत- गूढ़ता)

18 comments:

  1. हरकीरत जी सबसे पहले मैं प्रतिक्रिया देना चाहूँगा के मैं आपका बहुत बहुत शुक्रगुजार हूँ के आपने मेरे ब्लॉग के लिए कोई कविता भेजी है. धन्यवाद!

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  2. बहुत ही खूब लिखा है.........
    वक़्त को गहराई से समझा है इस कविता में, शब्दों को सुंदर तरीके से बांधना कोई हरकीरत जी से सीखे

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  3. सुंदर रचना
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
    www.zindagilive08.blogspot.com
    आर्ट के लि‌ए देखें
    www.chitrasansar.blogspot.com

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  4. bahut badhai faraz sahab, aapka blog bahut achchha or jaankari bhara hai,,,,,

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  5. बहुत सुंदर…आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  6. उत्तम! ब्लाग जगत में पूरे उत्साह के साथ आपका स्वागत है। आपके शब्दों का सागर हमें हमेशा जोड़े रखेगा। कहते हैं, दो लोगों की मुलाकात बेवजह नहीं होती। मुलाकात आपकी और हमारी। मुलाकात यहां ब्लॉगर्स की। मुलाकात विचारों की, सब जुड़े हुए हैं।
    नियमित लिखें। बेहतर लिखें। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं। मिलते रहेंगे।

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  7. Bahut khoobsoorat shabdon men ,gathe shilp ke sath likhi gayee kavita.Harkeerat evam Faraz ji donon ko badhai.
    Hemant Kumar

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  8. हमेशा की तरह ,,,कमाल,,,,,

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  9. बहुत सुन्दर रचना है।बधाई स्वीकारें।

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  10. zindgi zindadili ka naam hai, murda dil kya khak jiya kartehain. narayan narayan

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  11. आज जब
    दूर साल के दरख्‍तों से
    छनकर आती धूप
    थपथपाती है पीठ मेरी
    हवाये सहलाती हैं घाव
    धैर्य शंखनाद करता है.
    ... बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति...
    मुझे रमेश रंजक के गीत की पँक्यतियाँ याद आ रही हैं:


    धूप में जब भी जले हैं पाँव

    सीना तन गया है

    और आदमकद हमारा
    जिस्म लोहा बन गया है.


    यही तो है
    "धैर्य का शंखनाद"


    सुन्दर मुहावरे के लिए बधाई

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  12. आभार आपका अच्छी कविता पढने का मौका देने के लिये।

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  13. चाँद से बातें करना सीख लिया है
    रातों को आती है चाँदनी
    दूर पुरनूर वादियों की
    गहरी तलहटी से
    दिखलाती है...
    शिलाओं का नृत्य करना
    उच्छवासों से पर्वतों का
    समुंद्री लहरों की थपेडो़ के बीच
    आभार आपका अच्छी कविता पढने का मौका देने के लिये।

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  14. एक बेहतरीन रचना..बहुत खूब. आभार.

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  15. शामिख जी बहोत बहोत शुक्रिया ये नज्‍म प्रकाशित करने के लिए...! हाँ एक पंक्‍ति में एक
    शब्‍द छूट गया है कृपया उसे सुधार दें....''उच्‍छवासों से पर्वतों का थिरकना''...!

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  16. Bahut kamaal ki rachna.. Bahut bahut khoob..
    Aabhaar..

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  17. बहुत सुन्दर रचना है।बधाई स्वीकारें। its a wonderful blog with great positivity and motivating thoughts...

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